बुधवार को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हुई बारिश ने आम लोगो को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। खासकर दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में बारिश और ट्रैफिक जाम की वजह से लोगों को घंटों सड़क पर फंसे रहना पड़ा। सुबह से शुरू हुई बारिश ने दिनभर रफ्तार पकड़ी और देखते ही देखते सड़कों पर पानी भर गया, जिससे गाड़ियाँ रेंगने लगीं और कई जगह तो बंद ही हो गईं।
बारिश बनी आफत ?
मानसून की पहली भारी बारिश ने साफ कर दिया कि दिल्ली-एनसीआर में अभी भी जल निकासी की व्यवस्था बेहद कमजोर है। बारिश शुरू होते ही आईटीओ, मथुरा रोड, रिंग रोड, अशोक विहार, लक्ष्मी नगर, द्वारका, साकेत, हौज़ खास, रोहिणी, पंजाबी बाग, पटेल नगर और अन्य क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। वहीं नोएडा सेक्टर 62, 63, 18, 76, 137, और एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में भी हालात गंभीर रहे।
ट्रैफिक पुलिस रही बेहाल ?
दिल्ली और नोएडा ट्रैफिक पुलिस को अतिरिक्त फोर्स लगानी पड़ी ताकि यातायात को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन भारी बारिश के चलते कई ट्रैफिक सिग्नल बंद हो गए, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई। नोएडा में डीएनडी फ्लाईवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, सेक्टर 18 और सेक्टर 62 के आसपास लंबा जाम लग गया। दिल्ली में अक्षरधाम, एम्स, धौला कुआँ, लाजपत नगर, अशोक विहार और सराय काले खां पर भी गाड़ियों की लंबी कतारें देखी गईं।
सुबह दफ्तर जाने वाले हजारों लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऑटो और कैब चालकों ने बारिश का फायदा उठाते हुए किराया बढ़ा दिया, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ा। मेट्रो सेवा भी कई जगह धीमी रही, खासकर ब्लू और येलो लाइन पर बारिश के कारण स्कूली बच्चों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई स्कूलों ने आधे दिन बाद ही छुट्टी कर दी, जिससे अभिभावकों को अचानक बच्चों को लेने स्कूल आना पड़ा। स्कूल बसें भी ट्रैफिक में फंस गईं, जिससे बच्चों को काफी देर तक बसों में ही रहना पड़ा।
ऑफिस से घर लौटना बना मुश्किल ?
शाम को जब लोग ऑफिस से घर लौटने लगे तो हालात और खराब हो गए। बारिश दिनभर चलती रही और कई सड़कों पर पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि वाहन चालकों को अपने वाहन बंद कर छोड़ने पड़े। गुरुग्राम में सोहना रोड, गोल्फ कोर्स रोड और साइबर सिटी के आसपास जलभराव के कारण ऑफिस जाने और लौटने वाले कर्मचारियों को कई घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ा। लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें पोस्ट कर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की आलोचना की। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई लोगों ने जलजमाव के बीच कार और बाइक में फंसे अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे प्रशासन की लापरवाही हर साल इसी तरह की स्थिति पैदा करती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी कि अगले दो-तीन दिन दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश हो सकती है। बुधवार की बारिश उसी चेतावनी का हिस्सा थी। मौसम विभाग ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और पश्चिमी विक्षोभ की वजह से मानसून सक्रिय हो गया है। विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और सावधानी बरतने की अपील की है।
हर साल बारिश से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि जल निकासी की व्यवस्था की जा चुकी है, लेकिन जैसे ही पहली बारिश होती है, प्रशासन की सारी तैयारियां फेल हो जाती हैं। दिल्ली और नोएडा नगर निगम की ओर से दावा किया गया था कि नालों की सफाई पूरी कर ली गई है, लेकिन बुधवार को स्थिति कुछ और ही बयां कर रही थी।
वाहन चालकों का कहना था कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद भी नालों की सफाई समय पर नहीं होती, और हर बार बारिश में वही परेशानी झेलनी पड़ती है। नोएडा सेक्टर 62 के एक निवासी ने बताया, हर साल नाले चोक होते हैं, सड़कें तालाब बन जाती हैं, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं किया जाता।
जलभराव की वजह से डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। गंदे पानी के बीच लोगों का चलना, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए जोखिम भरा है। कई जगह गड्ढों और खुले मैनहोल में गिरने की भी घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में बारिश सिर्फ असुविधा ही नहीं, स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन गई है।
दिल्ली-एनसीआर की पहली भारी बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शहरी प्रबंधन में कितनी बड़ी खामियां हैं। जलजमाव, ट्रैफिक जाम, प्रशासनिक लापरवाही और लोगों की समस्याएं हर साल दोहराई जाती हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आता। ज़रूरत है कि शहरी निकाय अब कागज़ी योजनाओं से बाहर आकर ज़मीनी स्तर पर ठोस काम करें, ताकि अगले साल जब फिर मानसून आए, तो दिल्ली-एनसीआर के लोग राहत की सांस ले सकें, न कि हर बार की तरह पानी में फंसे नजर आएं।