दिल्ली के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित वेलकम इलाके में 11 जुलाई 2025 को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जब एक पुरानी चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई, इस हादसे ने स्थानीय लोगों को हिला कर रख दिया और शहर में फिर से इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
यह दुर्घटना शुक्रवार की दोपहर लगभग 1:30 बजे हुई, जब लोग अपने-अपने घरों में दोपहर का खाना खा रहे थे या आराम कर रहे थे। वेलकम की गली नंबर 14 स्थित यह चार मंजिला इमारत कई साल पुरानी बताई जा रही है और उसमें कई परिवार किराए पर रह रहे थे।
घटना के अनुसार, पहले इमारत में तेज़ आवाज़ हुई, और कुछ ही सेकंड के भीतर पूरी बिल्डिंग मलबे में तब्दील हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस और फायर डिपार्टमेंट को सूचना दी और खुद ही बचाव कार्य में जुट गए.
सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकल विभाग, एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स), दिल्ली पुलिस, और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे को हटाने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया और स्निफर डॉग्स की मदद से दबे हुए लोगों की तलाश की गई। अब तक मलबे से 11 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से 4 की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत और बचाव कार्य देर रात तक चलता रहा।
हालांकि शुरुआती जानकारी में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन शाम होते-होते यह खबर आई कि दो बुजुर्ग महिलाएं मलबे में दम घुटने से जान गंवा चुकी हैं। वहीं घायल लोगों में बच्चों और महिलाओं की संख्या ज्यादा है।स्थानीय विधायक और पार्षद ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया और प्रशासन से पीड़ितों को शीघ्र मुआवज़ा देने की मांग की।
स्थानीय निवासियों और नगर निगम अधिकारियों के अनुसार यह इमारत लगभग 40 साल पुरानी थी और कई बार इसे “खतरनाक” घोषित किया गया था। 2022 में नगर निगम की ओर से नोटिस भी दिया गया था कि यह इमारत जर्जर हालत में है, लेकिन किसी ने गंभीरता से इसे नहीं लिया। इसके अलावा, मानसून के चलते हुई लगातार बारिश से इमारत की नींव और दीवारें और भी कमजोर हो गई थीं। स्थानीय लोग कहते हैं कि कुछ दिन पहले ही दीवारों में दरारें आनी शुरू हो गई थीं, लेकिन मकान मालिक ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली सरकार ने इस हादसे को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा वेलकम में हुई बिल्डिंग गिरने की घटना बेहद दुखद है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। घायलों का मुफ्त इलाज कराया जा रहा है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” दिल्ली के एलजी वी.के. सक्सेना ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुरानी और जर्जर इमारतों की तत्काल जांच कर उन्हें खाली कराया जाए।
हादसे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। कई स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम केवल कागज़ों में काम करता है और ज़मीनी हकीकत को नजरअंदाज करता है। दिल्ली सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायल लोगों को 2 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायल लोगों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
इसके अलावा, मकान पूरी तरह से नष्ट हो जाने के कारण वहां रहने वाले लोगों को अस्थायी आश्रय गृहों में स्थानांतरित किया गया है। कुछ गैर सरकारी संगठनों (NGOs) ने भी आगे आकर भोजन और कपड़ों की व्यवस्था की है।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि दिल्ली जैसे महानगर में जर्जर इमारतों की हालत कितनी खतरनाक हो चुकी है। कई इलाकों में सैकड़ों पुरानी इमारतें खड़ी हैं, जिनकी नियमित जांच नहीं होती। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन इमारतों की मरम्मत या ध्वस्तीकरण नहीं किया गया तो ऐसे हादसे और भी हो सकते हैं।
वेलकम इलाके में गिरी चार मंजिला इमारत का यह हादसा न सिर्फ एक प्रशासनिक चूक है, बल्कि यह मानवीय लापरवाही और जागरूकता की कमी का भी नतीजा है।
अब वक्त आ गया है कि सरकार और आम जनता दोनों मिलकर इस तरह के खतरों को गंभीरता से लें और पुरानी इमारतों की समय-समय पर जांच हो। जो भी इमारतें रहने योग्य नहीं हैं, उन्हें खाली कराया जाए और समय पर नवीनीकरण या पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।