उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के मायके वालों से शादी में ₹2 लाख रुपये और एक कार की मांग की थी। जब यह मांग पूरी नहीं हुई, तो उसने अपने आठ महीने के मासूम बेटे को पैर से पकड़कर उल्टा लटका दिया और गांव में घुमाने लगा।
यह पूरी घटना टांडा थाना क्षेत्र के एक गांव की है। बताया जा रहा है कि आरोपी अपने ससुराल वालों से काफी समय से दहेज की मांग कर रहा था। लेकिन जब उसे दहेज में कार और पैसे नहीं मिले, तो उसने बेहद ही अमानवीय हरकत कर डाली। अपने ही बेटे को हथियार बनाकर, उसने पूरे गांव में प्रदर्शन किया। यह सब उसने इसलिए किया ताकि लड़की वालों पर दबाव बना सके और समाज को दिखा सके कि उसे दहेज नहीं मिला।
गांव के कुछ लोगों ने इस घटना का वीडियो बना लिया जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी अपने छोटे से बच्चे को उल्टा पकड़कर हवा में घुमा रहा है। इस वीडियो के वायरल होते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि, पुलिस ने आरोपी पर सिर्फ “शांति भंग” करने का मामला दर्ज किया है, लेकिन समाज में इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी क्रूरता के लिए सिर्फ यही सजा काफी है? जब एक पिता अपने ही बच्चे को जानबूझकर खतरे में डाल रहा है, तो उस पर कड़े कानून क्यों नहीं लगाए गए?
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं है, बल्कि यह दहेज की बीमारी और लड़की के परिवार पर होने वाले दबाव की एक कड़वी सच्चाई है। आज भी कई जगहों पर शादी को एक लेन-देन का सौदा समझा जाता है। दूल्हे पक्ष अक्सर यह सोचकर दहेज मांगता है कि वो लड़की को अपने घर ला रहे हैं, तो बदले में कुछ मिलना चाहिए। इसी सोच ने समाज में न जाने कितनी बेटियों को मौत के घाट उतार दिया है या उनकी जिंदगी को नर्क बना दिया है।
भारत में दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध हैं। दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज मांगना गैरकानूनी है। इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत पत्नी को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने पर सजा का प्रावधान है। इस मामले में तो एक मासूम बच्चे की जिंदगी से भी खिलवाड़ किया गया है, जिसे बाल सुरक्षा कानून के तहत भी देखा जाना चाहिए।
यह समय है कि हम सब मिलकर ऐसे मामलों में आवाज़ उठाएं। अगर आपके आस-पास कोई व्यक्ति दहेज मांगता है या किसी लड़की को परेशान करता है, तो चुप न रहें। पुलिस में शिकायत करें, और उस लड़की और उसके परिवार का समर्थन करें। याद रखें, दहेज एक अपराध है – न कि कोई परंपरा।
रामपुर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जब तक हम खुद आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। हमें अपने घरों में, स्कूलों में, और समाज में यह बात बार-बार कहनी होगी कि “बेटियां बोझ नहीं होतीं, और शादी कोई सौदा नहीं होती।”